मुझे इक नज़्म लिखनी है
मुझे बोला है उसने भाई मेरे
मेरे जन्मदिन पर नाम मेरे नज़्म तुम लिक्खो
तो लिखता हूँ
मुझे लिखना है चिड़ियों की चहकती तान का किस्सा
मुझे लिखना है तेरी राह में कोई ख़ार न आये
मुझे दरिया की लहरों को समन्दर नाम देना है
मुझे वो वक़्त लिखना है जो रौशन कर दे तेरी शाहराहों को
मुझे वो फूल लिखने हैं जो महका दें तेरे हर एक लम्हें को
मुझे वो रंग लिखना है जो चमके लम्हा दर लम्हा जबीं पर
मुझे ख़ुशबू भी लिखनी है जो तेरे हर सुख़न में जज़्ब हो जाये
मुझे लिखना बहुत कुछ है मगर ये लफ्ज़ मेरे
तेरे रौशन सरापे की मुक़द्दस रौशनी को लिख नहीं सकते
मगर तुम जान लो इतना
कि मेरी बहन, मेरी हमसुख़न
तेरी हर रह में रौशन कहकशां हो
तेरा हर इक सुख़न हो जाविदानी
तेरी मुस्कान भारी हो गुलों पर
तेरा गुलनार चेहरा यूँही दमके
ख़ुदा से बस ये ही मेरी दुआ है
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