समंदर चुप है बहुत खामोश है आज न कोई बात करता है न मुझको देखता है किनारे भी बड़े तनहा पड़े है बड़ा मानूस मंज़र है ये सारा बड़ी आहिस्तगी से मेरे अंदर का मंज़र सारे आलम पे छा गया है 2012
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