Friday, February 12, 2016

कुछ ख़्वाब बुनो

कुछ ख़्वाब बुनो जाना
खुशबू और रंग बहारों के
कुछ यादों के कुछ फूलों के
कुछ राग रंग मल्हारों के
बारिश की गिरती बूदों के
सर्दी में ठिठुरती शामों के
गर्मी की मचलती सुबहों के
और मेरे भी
तन्हा तन्हा
कुछ ख्वाब बुनो
2011

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