Thursday, February 18, 2016

ख़्वाब और मुहब्बत

उस दिन ऐसा ही मौसम था
काले बादल पूरे आकाश पे छाये थे
ठंडी ठंडी हवा के झोंके झूम रहे थे
और समंदर लहरों लहरों मचल रहा था
उस मौसम में साहिल पर एक शाम जवां थी
कोई तनहा ठंडी रेत पे टहल रहा था
गीला चेहरा बिखरे गेसू भीगी आँखें
जैसे कोई ख़्वाब मुहब्बत ढूंढ रहा हो
2011

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