Sunday, March 13, 2016

चराग़ ए यादां

आज मेरे शहर ए दिल में
बारिशों का मौसम है
कुछ चराग़ ए यादां है
कुछ विसाल के लम्हे
फिर जला लिए मैंने
सोचता हूँ ऐसे में
तेरी याद का सहरा
कैसे पार करना है
सोच के दरीचों पर
कौन ख़ाक़ डालेगा
बारिशों को मौसम भी
मुझको मार डालेगा

June 2015

Tuesday, February 23, 2016

पल

कभी भी कहीं भी कैसे भी
मिल सकते हैं वो पल
जो हमने साथ गुज़ारे थे
मगर बस शर्त इतनी है
कि तुम यादों की रिमझिम बारिशों में
भीगना चाहो

Sunday, February 21, 2016

मंज़र

समंदर चुप है बहुत खामोश है आज
न कोई बात करता है
न मुझको देखता है
किनारे भी बड़े तनहा पड़े है
बड़ा मानूस मंज़र है ये सारा
बड़ी आहिस्तगी से
मेरे अंदर का मंज़र
सारे आलम पे छा गया है
2012

Friday, February 19, 2016

गुज़री हुई रात

रात यूँही गुज़र जाती है
न कोई निशान छोड़ती है पीछे
न कोई ख़्वाब बुनती है
बस आधी अधूरी सी आस में
लिपटा हुआ एक पल थमा देती है
कहती है कल फिर मिलेंगे
मुद्दतों से ऐसी ही रातें गुज़ारता हूँ मैं
2012

Thursday, February 18, 2016

ख़्वाब और मुहब्बत

उस दिन ऐसा ही मौसम था
काले बादल पूरे आकाश पे छाये थे
ठंडी ठंडी हवा के झोंके झूम रहे थे
और समंदर लहरों लहरों मचल रहा था
उस मौसम में साहिल पर एक शाम जवां थी
कोई तनहा ठंडी रेत पे टहल रहा था
गीला चेहरा बिखरे गेसू भीगी आँखें
जैसे कोई ख़्वाब मुहब्बत ढूंढ रहा हो
2011

Friday, February 12, 2016

कुछ ख़्वाब बुनो

कुछ ख़्वाब बुनो जाना
खुशबू और रंग बहारों के
कुछ यादों के कुछ फूलों के
कुछ राग रंग मल्हारों के
बारिश की गिरती बूदों के
सर्दी में ठिठुरती शामों के
गर्मी की मचलती सुबहों के
और मेरे भी
तन्हा तन्हा
कुछ ख्वाब बुनो
2011

उदास हूँ मैं

कई दिनों से,
उदास हूँ मैं
तुम्हारी खुशबू के नरम झोंके
उदास नज़्मों के सुर्ख़ पन्ने
गुलाब रुत के वो फूल सारे
सियाह रातें, बेरंग मंज़र
समन्दरों की तमाम लहरें
बुझे बुझे से ये चाँद तारे
ये कह रहे हैं
मेरी मुहब्बत उजड़ गयी है
इसलिये तो
कई दिनों से उदास हूँ मैं