Wednesday, February 10, 2016

सुजॉय के नाम

जो नज़र में है उसे देखना
उसे देखना फिर ग़ौर से उसे सोचना
फिर सोच में अमल के रस्ते खोजना
तेरी अज़्मतें तेरे हौसले
मैं इससे ज़्यादा क्या कहूँ
मैं तो ये कहूँ
ये जो हौसलों का मेयार है
ख़ुदा करे
यूँ ही अज़्मतों की नज़र रहे
तेरा हर्फ़ हर्फ़ हो दिल सुख़न
तेरी बात बात हो सुर्खरू
तू जो भी चाहे मिले सदा
यही मेरे दिल का बयान है

Monday, February 8, 2016

सुमैया

मुझे इक नज़्म लिखनी है
मुझे बोला है उसने भाई मेरे
मेरे जन्मदिन पर नाम मेरे नज़्म तुम लिक्खो
तो लिखता हूँ

मुझे लिखना है चिड़ियों की चहकती तान का किस्सा
मुझे लिखना है तेरी राह में कोई ख़ार न आये
मुझे दरिया की लहरों को समन्दर नाम देना है
मुझे वो वक़्त लिखना है जो रौशन कर दे तेरी शाहराहों को
मुझे वो फूल लिखने हैं जो महका दें तेरे हर एक लम्हें को
मुझे वो रंग लिखना है जो चमके लम्हा दर लम्हा जबीं पर
मुझे ख़ुशबू भी लिखनी है जो तेरे हर सुख़न में जज़्ब हो जाये

मुझे लिखना बहुत कुछ है मगर ये लफ्ज़ मेरे
तेरे रौशन सरापे की मुक़द्दस रौशनी को लिख नहीं सकते
मगर तुम जान लो इतना
कि मेरी बहन, मेरी हमसुख़न

तेरी हर रह में रौशन कहकशां हो
तेरा हर इक सुख़न हो जाविदानी
तेरी मुस्कान भारी हो गुलों पर
तेरा गुलनार चेहरा यूँही दमके
ख़ुदा से बस ये ही मेरी दुआ है

Tuesday, February 2, 2016

रूह कहती है

दिल तो कहता है अब तेरी जानिब
फिर कभी लौट कर नहीं आना
रूह कहती है कि खामोश रहो
नक़्श किस याद का मिटाओगे
ख़्वाब किस तौर भूल जाओगे
इश्क़ सफ़हे नहीं किताबों के
जिनको एक बार पढ़ा भूल गए
इश्क़ तो ज़ीस्त का उन्वान है
क्यूँ सुलगते हैं बिना उसके ये दिन रात कहो
क्यूँ किसी तौर उसे भूल नहीं पाते हो
रूह कहती है कि खामोश रहो
ख़्वाब के साथ ही सफ़र पे रहो
2012

Thursday, January 21, 2016

चलो फिर से

चलो एक बार कुछ ऐसा करलें
कि हम दोनों एक लम्हा ऐसा बिताएं
जो हज़ार सालों पर भारी हो
जिसे चाह कर भी हम दोनों
खुद से अलग न कर पाएं
चलो ये अहद फिर से बांधें
चलो फिर से ......
यही बातें हुई थीं ना
जब हम आखिरी बार मिले थे
2012

Sunday, January 10, 2016

काश

साहिल की ठंडी रेत पर
साथ साथ क़दम बढ़ाते
जब तुमने रुक कर
मुझसे कहा था
काश ये वक़्त यहीं थम जाये
चंदा तारे बहता दरिया ठंडा साहिल
एक तेरे आने की ख़्वाहिश में
जाने कबसे रुके हुए हैं
2011

Tuesday, January 5, 2016

तुम्हें याद होगा

अगर सितारों की हदों तक निगाह डालो
तो इस ज़मीं से उस आसमां तक
हरेक मंज़र मेरी मुहब्बत से तर मिलेगा
ये बहता दरिया ये ठहरी झीलें
उफान भरता हुआ समंदर
ये सारे मेरी मुहब्बतों के हैं इस्तआरे
हवाओं पे लिखी सारी तहरीरों को गर पढ़ो तुम
तो जान लोगे
वो सारी बातें जो अनकही थीं
तुम्हे मिलेंगी
हवाओं पे लिखी तहरीरों को भी पढ़ना
ये फूल कलियाँ ये बाग़ सारे बहार मंज़र
तुम्हारी चाहत में खिल रहे हैं
तुम आओ देखो कोई कहाँ तक
तुम्हारी बातें हरेक सतर में यूँ लिख रहा है
कि जैसे अब तक
तुम्हे ये सब कुछ भी याद होगा
2013

Friday, January 1, 2016

प्यार का उनवां

तुम्हें गर दर्द लिखना हो
तो यूँ करना
किसी काग़ज़ के टुकड़े को
हवाओं के इशारों पर बहा देना
उसे कुछ नाम न देना
वो काग़ज़ भीग जाये जब
किसी खामोश लम्हे में
चराग़ों की हदो पर रखके पढ़ लेना
मेरे हर दर्द का किस्सा
बहुत रोशन लिखा होगा

तुम्हे गर रात लिखनी हो
मेरी आँखों के कोनो पर
कोई एक झील का क़तरा
कोई खामोश सा लम्हा
हज़ारों साल तक ठहरे
उसे महसूस कर लेना
मेरी रातों में बहते दर्द का
हर राज़ पा लोगे

मगर जानां
तुम अपनी डायरी में जब भी लिक्खो
प्यार का उनवां
तो शाम ए आखिर का वो पल भी लिखना
मुहब्बतों के दयार में जब
दो रूहें हम आगोश हो गई थीं
वो पल अभी तक साहिल ए समंदर
वहीं पड़े हैं
उन्हें उठाकर तुम अपने सफहों में दर्ज करना
न जाने कब की उदास रूहें क़रार पा लें
2013