Friday, January 1, 2016

प्यार का उनवां

तुम्हें गर दर्द लिखना हो
तो यूँ करना
किसी काग़ज़ के टुकड़े को
हवाओं के इशारों पर बहा देना
उसे कुछ नाम न देना
वो काग़ज़ भीग जाये जब
किसी खामोश लम्हे में
चराग़ों की हदो पर रखके पढ़ लेना
मेरे हर दर्द का किस्सा
बहुत रोशन लिखा होगा

तुम्हे गर रात लिखनी हो
मेरी आँखों के कोनो पर
कोई एक झील का क़तरा
कोई खामोश सा लम्हा
हज़ारों साल तक ठहरे
उसे महसूस कर लेना
मेरी रातों में बहते दर्द का
हर राज़ पा लोगे

मगर जानां
तुम अपनी डायरी में जब भी लिक्खो
प्यार का उनवां
तो शाम ए आखिर का वो पल भी लिखना
मुहब्बतों के दयार में जब
दो रूहें हम आगोश हो गई थीं
वो पल अभी तक साहिल ए समंदर
वहीं पड़े हैं
उन्हें उठाकर तुम अपने सफहों में दर्ज करना
न जाने कब की उदास रूहें क़रार पा लें
2013

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