ये तेरा मेरा जो दर्द का रिश्ता है जानां
मुहब्बत के किसी बाब में दर्ज नहीं
कभी लिखा न किसी ने
पढ़ा सुना न कभी
एक बेनाम सा किस्सा है
फ़क़त कुछ भी नहीं
और इस बेनाम से किस्से के दो किरदार हैं हम
एक बहते हुए दरिया के दो किनारे हैं
साथ चलते हैं मगर एक नहीं हो सकते
Feb 2011
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