Monday, August 17, 2015

आँखें ऐसे टूट के बरसें

एक ऐसा गीत बुनो
जिसमे मेरी तेरी आवाज़ें हों
दर्द में डूबी बिखरी सी दो आवाज़ें
जिसमे शायर ने लिखा हो सावन का मौसम
भीगा लहजा भीगी पलकें भीगे सुर ठहरे हों
आँखें ऐसे टूट के बरसें
जैसे ख़्वाब कोई मरता हो
जैसे साये की ख़्वाहिश में
कोई धूप में जलता हो
एक ऐसा गीत बुनो

No comments:

Post a Comment